Thursday, October 22, 2020

अमेरिका ने माना चीन के नाम पर पाक ने लगाया चूना, अब ऐसे करेगा वसूली

चीन के इशारे पर पाकिस्तान की विदेश नीति तय होती है और चीन के ही इशारे पर पाकिस्तान घरेलू वित्तीय नीतियां बना रहा है। अमेरिका ने जहां चीन के साथ लंबी लड़ाई तैयारी कर ली है तो वहीं पाकिस्तान से सूद समेत वसूली की जायेगी। 

नई दिल्ली। अमेरिकी थिंक टैंक अब ये पूरी तरह मान चुका है कि चीन और अफगानिस्तान को लेकर पाकिस्तान ने अमेरिकी सरकारों को खूब चूना लगाया है। इसलिए अब अमेरिका ने पाकिस्तान को पूरी तरह से त्याग दिया है। अमेरिका को यह भी पता चल गया है कि पाकिस्तान अब पूरी तरह से चीन की गोद में बैठा है। चीन के इशारे पर पाकिस्तान की विदेश नीति तय होती है और चीन के ही इशारे पर पाकिस्तान घरेलू वित्तीय नीतियां बना रहा है। अमेरिका ने जहां चीन के साथ लंबी लड़ाई तैयारी कर ली है तो वहीं पाकिस्तान से सूद समेत वसूली की जायेगी।

इसलिए पाकिस्तान को छोड़कर अब अमेरिका चीन के खिलाफ लंबी जंग की तैयारी कर रहा है। हाल में ही पाकिस्तान ने हर मोर्चे पर चीन का साथ देने का खुलेआम वादा किया है। पाक ने न केवल वन चाइना पॉलिसी का समर्थन किया है बल्कि ताइवान और हॉन्ग कॉन्ग के मुद्दे पर भी चीन के साथ हरदम खड़े रहने की बात कही है।

यूरोपीय फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज के अनुसार, चीन का खास दोस्त पाकिस्तान अब अमेरिका के लिए वैसी अहमियत नहीं रखता जैसी वह अफगानिस्तान वॉर के समय रखता था। अमेरिका एशिया में रूस की बढ़त रोकने और सामरिक रूप से खुद को मजबूत बनाने के लिए पाकिस्तान की मदद लेता रहा है। लेकिन, हाल के दिनों में चीन के साथ तनाव बढ़ने के बाद समीकरण बदल गए हैं।

अमेरिका ने पाकिस्तान को न केवल अलग-थलग कर दिया है बल्कि, कई आर्थिक सहायता पर भी रोक लगा दी है। ओबामा से लेकर ट्रंप तक के शासन काल में पाकिस्तान को दी जाने वाली आर्थिक सहायता को खत्म कर दिया गया। इतना ही नहीं, हाल के दिनों में अमेरिका ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता देने से भी इनकार किया है।

अमेरिका की एक शीर्ष राजनयिक ने कहा था कि ट्रंप प्रशासन आतंकवादी समूहों का सफाया करने के लिए ‘विश्वसनीय कदम’ उठाने के वास्ते इस्लामाबाद पर दबाव बना रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद की ओर से जेयूडी प्रमुख हाफिज सईद के अभियोजन और दोषसिद्धि जैसे आतंकवाद रोधी हाल में उठाए कदम महत्वपूर्ण तो हैं लेकिन स्थायी नहीं हैं।

अमेरिका ने तिब्बती लोगों की सार्थक स्वायत्तता के लिए अपने समर्थन का फिर से खुला इजहार किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि तिब्बती लोगों के बुनियादी तथा अहस्तांतरणीय मानवाधिकारों के लिए, उनके विशिष्ट धर्म, संस्कृति और भाषायी पहचान को संरक्षित रखने की खातिर काम करने के लिए हम दृढ़ संकल्पित हैं। भारत में रह रहे तिब्बत के निर्वासित धार्मिक नेता दलाई लामा तिब्बत के लोगों के लिए सार्थक स्वायत्तता की मांग करते रहे हैं। लेकिन चीन 85 वर्षीय दलाई लामा को अलगाववादी मानता है।

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ ब्रायन ने कहा था कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव शी जिनपिंग खुद को सोवियत तानाशाह जोसेफ स्टालिन के उत्तराधिकारी के रूप में देखते हैं। इतना ही नहीं, अमेरिकी एनएसए ने फीनिक्स में एक कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा कि हमारी सहनशीलता और भोलेपन के दिन अब खत्म हो गए हैं। हम अब कम्युनिस्ट पार्टी और उसकी विचारधारा के प्रसार पर लगाम लगाने के लिए कार्रवाई करेंगे। अमेरिका अब चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के कारण पैदा होने वाले खतरों को लेकर सचेत हो गया है।

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